SC raps WB CS: बंगाल मुख्य सचिव ने HC चीफ जस्टिस का फोन नहीं उठाया; सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते क्या कहा?

बंगाल मुख्य सचिव ने HC चीफ जस्टिस का ही फोन नहीं उठाया; सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए क्या-क्या कहा? CJI को सुनिए

Supreme Court raps West Bengal Chief Secretary

Supreme Court raps West Bengal Chief Secretary

SC raps WB Chief Secretary: अक्सर यही देखा जाता है कि अफसर आम लोगों की नहीं सुनते और अपनी अफसरशाही झाड़ते हैं। लेकिन जब कोई अफसर इतना बड़ा हो जाये की वो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का भी फोन न उठाए तो फिर क्या? दरअसल मामला पश्चिम बंगाल का है। आरोप है कि बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का ही फोन नहीं उठाया और कई बार ऐसा किया। वहीं जब यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने उठा तो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई करते हुए सबके सामने बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई।

CJI ने मुख्य सचिव से पूछा, 'क्या समस्या है आपको, आप कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस का भी फोन नहीं उठाते?' इसके बाद जब मुख्य सचिव ने कहा कि 'मैंने नंबर हाईकोर्ट के साथ शेयर किया हुआ है' तो इस पर बेंच ने कहा कि 'आपका नंबर ज्यादातर बंद ही जाता है।' इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि 'नंबर बंद नहीं जाता है, बल्कि नंबर उच्च सुरक्षा वाला है।' इस पर बेंच ने कहा कि 'सुरक्षा इतनी अधिक है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी आपसे संपर्क न कर सकें?'

इधर बेंच ने मुख्य सचिव को नसीहत देते हुए कहा कि 'कृपया स्वयं को थोड़ा नीचे लाइए ताकि हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस जैसे साधारण अधिकारी भी आप तक पहुँच सकें।' इसके बाद मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 'मिसकम्युनिकेशन हुआ है और वह इस मामले में माफी मांगते हैं।' इसके बाद बेंच ने कहा कि 'माफी यहां नहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जाकर मांगिए।'

वहीं CJI ने मुख्य सचिव से कहा कि ज्यूडिशियल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ इस तरह के व्यवहार और कार्यशैली को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन का फेल्योर दिखाता है। बेंच ने कहा कि इस तरह से राज्य में डिस्टरबेंस की स्थिति पैदा हो सकती है। बेंच ने कड़े लहजे में कहा कि ज्यूडिशियल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ अगर सिविल एडमिनिस्ट्रेशन इस तरह से काम करेगा तो यह ठीक नहीं रहेगा। सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और यह क्रेडिबिलिटी का सवाल है।